Monday, 11 February 2013


सपने बेचता हूँ
      
         सौदागर हूँ
सपने बेचता हूँ
सपने तो तुम्हारे ही है
उन्हें बस अपनी नजर से देखता हूँ

सपने बड़े अजीब होते है
फिर भी दिलो के करीब होते है
रोज टूट जाते है
मैं रोज ही उन्हें बनाता हूँ
मैं तो दुनिया को बस
चलने की राह दिखाता हूँ

किसी की हिम्मत है टूटी
किसी की ज़िन्दगी आधे में रुकी
मैं तोह बस तुम्हारी हिम्मत बढाता हूँ
तुम्हे ही तुमसे मिलवाता हूँ

ज़िन्दगी खुद एक सपना है
सपना है फिर भी ना अपना है
पता नहीं कब यह सपना टूट जाना है
ज़िन्दगी ने हमसे रूठ जाना है

पर उससे पहले
उठ खड़ा हो
चल कर दिखा
एक बार तो मुझे
अपना यह सपना जीकर दिखा
खुश हो जाऊ मैं भी एक बार
मिला था मुझे तेरे जैसा यार

                                                              ---- जे. पी. सिंह